माँ….।

मेरी ख्वाहिश है की मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊँ

माँ से इस तरह लिपटूँ कि बच्चा हो जाऊँ।                                                               

                                          -मुनव्वर राना

तेरी ममता का प्यासा हूँ, माँ

मैं तेरे आँखों का तारा हूँ,

तू मुझसे जुदा हैं अभी पर तेरी याद रोज़ आती हैं,

फिर तेरी आँचल में सोने की जिद्द कर जाती हैं।

फिर तेरे पाओ दबाने का दिल करता हैं,

तेरे हाथों का खाना खाने के लिए हर पल दिल मचलता हैं।

माँ। मन करता हैं अभी दौड़ के तेरे पास आ जाऊं,

सारी दुनिया भूल के तेरे आँचल में सो जाऊं।
फिर तुझसे किये हुए वादे याद आ जाते हैं,

और बढ़ते हुए पैर खुद -ब-खुद थम जाते हैं।

हर रोज़ सुबह उठकर सबसे पहले तेरी आवाज़ सुनने को दिल करता हैं,

रात में सोने से पहले तेरी सूरत देखने को तरसता हूँ।

जब भी याद तेरी आती हैं नाम खुदा का लेकर, सजदे पे सिर कर लेता हूँ,

नाम तुम्हारे मैं अपने सारी खुशियां कर देता हूँ।
बस एक ही सपना हैं मेरा, नाम मैं तेरे हर काम करू,

कुछ ऐसा कर जाऊं के सारे दुनिया में तेरा नाम रौशन करूं।

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