सिपाही का पैगाम देश के नाम

Ankur Kumar

आओ दोस्तों सुनाता हूं एक दास्ताँ तुम्हे

कौनसा खेल खेल रहे हैं हम

तुम कर रहे हो तैयारी दिवाली की

और सरहद पर गोलियां झेल रहे हैं हम।

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चाहे हो धुप जितनी

या पड़ रही हो कितनी भी ठण्ड

सदा तम्हारी हिफाजत के लिए

तैनात रहे हैं हम।।

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दुश्मन मारेगा एक

हम उसके चार ठोक के आएंगे

भारत माँ हमारी महफूज रहें

देश की आन हम बचाएंगे।।

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यही कसम खाई थी हमने

कटा देंगे सर लेकिन झुकना हमें गवारा नही

जरुरत पड़ने पर देश के नाम जान भी कर देंगे

देश के अलावा कोई और हमें प्यारा नहीं।।

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माँ पूछे तो कह देना

देश का बेटा देश की मिटटी में समां गया

पापा पूछें तो कह देना

उनका सीना चौड़ा मैं कर गया

भाई पूछे तो कह देना

अपनी गाड़ी उसके नाम कर गया

बेहेन पूछे तोह कह देना

रक्षाबंधन का फर्ज उसका भाई निभा गया

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