सिपाही का पैगाम देश के नाम

Originally posted on Ankur Kumar:
आओ दोस्तों सुनाता हूं एक दास्ताँ तुम्हे कौनसा खेल खेल रहे हैं हम तुम कर रहे हो तैयारी दिवाली की और सरहद पर गोलियां झेल रहे हैं हम। . चाहे हो धुप जितनी या पड़ रही हो कितनी भी ठण्ड सदा तम्हारी हिफाजत के लिए तैनात रहे हैं हम।। .…

इंसानियत …|

वो मंदिर भी जाता हैं वो मस्जिद भी जाता हैं, मंदिर से आते वक़्त, वो मस्जिद में भी सिर झुका आता हैं।   किसी धर्म को नहीं, वो इंसानियत को अपनाता हैं, उसके जज्बे में सारे हिंदुस्तान की तस्वीर नज़र आ जाती हैं|   भयभीत हो उसके मजहब से, सियायत कोसो दूर थम जाता हैं, … More इंसानियत …|

माँ….।

मेरी ख्वाहिश है की मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊँ माँ से इस तरह लिपटूँ कि बच्चा हो जाऊँ।                                                                          … More माँ….।

How far would we go?

Today, while scrolling the “news feed on Facebook, my eyes went on the above picture, and my heart was filled with anguish and grief. This image depicts the pain and miserable condition of Syria and other terror-hit countries across the globe. The two little children bowing and grieving at their father’s grave portrays the sorrow … More How far would we go?